Sagar| बूंद-बूंद पानी को तरस रहे थे लोग, फिर माता ने जो किया..55 साल बाद भी नहीं भूल पाए लोग
चैत्र नवरात्रि शुरू होने के लिए अब कुछ ही घंटे शेष रह गए हैं। सागर के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में नवरात्रि को लेकर तैयारियां पूरी हो गई हैं। आज रात से ही कई मंदिरों में घट स्थापना शुरू हो जाएगी, और फिर 9 दिन तक माता की आराधना की जाएगी। सागर के चमत्कारी बाघराज मंदिर में माता हरसिद्धि तीन रूपों में विराजमान हैं और वे सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
यहां लोगों ने उनके चमत्कार के कई प्रत्यक्ष प्रमाण देखे हैं। एक तो यहां अजगर दादा साक्षात रूप में विराजमान हैं। पहले यहां पर माता के दर्शन करने बाघ आते थे। चैत्र नवरात्रि और शारदेय नवरात्रि में यहां 9 दिन का मेला लगता है, जिसमें शहर के हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
चैत्र नवरात्रि के समय यहां पिछले 55 सालों से शतचंडी यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य क्षेत्र की समृद्धि और किसानों की खुशहाली है।
मंदिर के पुजारी पंडित पुष्पेंद्र पाठक बताते हैं कि 70 के दशक की बात है, एक बार बरसात का सीजन आधा गुजर जाने के बाद भी बारिश नहीं हो रही थी। भादों के महीने में पानी के लिए हाहाकार मचा था, तब विप्र जनों और विद्वानों ने माता के दरबार में बैठकर मंथन किया, जिसमें यह तय किया गया कि भादों के महीने में ही वरुण यज्ञ किया जाएगा।
जब यज्ञ शुरू हुआ, तो इसके छठे दिन ही माता रानी ने ऐसा चमत्कार किया कि बारिश होने लगी। इतनी बारिश हुई कि कोई दो दिन तक अपने घर नहीं जा सका था, क्योंकि मंदिर के थोड़े आगे से नहर निकली हुई थी, जो उफान पर थी। उस समय पुल नहीं थे।
ऐसा होने के कुछ साल पहले ही चैत्र नवरात्रि में सत चंडी यज्ञ करने की शुरुआत हुई थी। तब बारिश होने के बाद सभी ने संकल्प लिया था कि अब इसे निरंतर किया जाएगा। तब से ही यह आयोजन माता रानी की इच्छा और कृपा से हो रहा है। मां भगवती जब तक चाहेंगी, तब तक यह अनुष्ठान चलते रहेंगे।
पुजारी के अनुसार, सन 70 में पहली बार चैत्र नवरात्रि के समय किसानों द्वारा ही घास की यज्ञशाला बनाकर सत चंडी यज्ञ की शुरुआत की गई थी। तब से इस क्षेत्र के किसानों पर माता की कृपा है।