Sagar-300 सालों से मंदिर से बाहर आकर होली खेलते हैं बिहारी जी,अद्भुत है बुंदली होली sagar tv news
सागर की लोक परंपराएं अद्भुत और निराली है. हर तरह के त्यौहार और जीवन से जुडे़ प्रमुख प्रसंगों को लेकर तरह-तरह के लोकाचार और परंपराएं यहां देखने मिलती है. इसी तरह होली से जुड़ी एक 300 से साल से ज्यादा पुरानी परंपरा है. जब बिहारी जी सरकार अपने भक्तों के साथ होली खेलने राजमंदिर से बाहर आते हैं और पूरा माहौल रंग गुलाल से सराबोर हो जाता है.
सागर के सर्राफा बाजार में स्थित देव अटल बिहारी जी सरकार का मंदिर सागर शहर ही नहीं बल्कि आसपास के लोगों का आस्था का केंद्र है. यहां होली, दीपावली और सावन के महीने से जुड़ी कई तरह की परंपराएं हैं. जिनको सागर शहर के लोग आस्था और भक्ति के साथ मनाते हैं.
मंदिर के पुजारी अमित चांचोदिया बताते हैं कि "होलिका दहन के दूसरे दिन धुरेड़ी के दिन राजमंदिर से बाहर अपने भक्तों के साथ होली खेलने आते हैं. इसमें लोग रंग, गुलाल खेलते हैं और फागें गाते हैं. शाम के समय बिहारी जी की होली शुरू होती है, ये देर रात होली चलती है. भक्तों की मंडली फागें गाती है. देर रात आरती होती है और फिर प्रसाद वितरण होता है. काफी धूमधाम से होली होती है, खूब रंग गुलाल होता है.