Sagar- प्रदेश का इकलौता मंदिर पटनेश्वर धाम, जहां पंचदेव के साथ विराजे है महादेव
सागर जिले के ढाना में भगवान भोलेनाथ का दिव्य और भव्य स्थान पटनेश्वर धाम के नाम से प्रसिद्ध है. यहां पिछले कुछ सालो से महाशिवरात्रि को महोत्स्व के रूप में मनाया जा रहा है, पंच देवों के साथ विराजमान स्वयंभू भोलेनाथ सभी की मनोरथ पूर्ण करते है, यही वजह है की दिन भर यहां भक्तो का ताता लगा रहता है, यह शिव जी के विवाह की सभी रस्मे निभाई जाती है
और भव्य बारात निकाली जाती है, मंदिर परिसर में मेला लगता है दुकाने सज गई है, दिन भर भंडारा भी चलेगा, बसंत पंचमी पर लग्न उत्स्व से इसकी शुरुवात हुई थी मंगलवार को हल्दी की रस्मे निभाई गई है, बुधवार सुबह से रुद्री निर्माण के साथ पूजन पाठ शुरू होगा दिन भर कई कार्यक्रम चलेंगे।
इस क्षेत्र को संतो की तपोभूमि भी कहा जाता है, यहां राम राम महाराज ,सियावर महाराज, लोहार बाबा की चमत्कारिक घ्नाये भी जुडी हुई है, साथ ही इन्ही के नाम से यहां पांच विशाल वृक्ष भी लगे हुए जिनके नीचे वे तपस्या किया करते थे,
मंदिर समिति के राजीव हजारी के मुताबिक, 'सागर रेहली मार्ग पर सागर से करीब 20 किमी दूर ढाना के पास प्राचीन और ऐतिहासिक पटनेश्वर मंदिर स्थित है. मंदिर का निर्माण सागर की मराठा रानी लक्ष्मीबाई खैर द्वारा कराया गया था. उनके सपने में भगवान शिव आए थे, तब उन्होंने मंदिर का निर्माण करवाया. कहा जाता है कि रानी लक्ष्मीबाई खैर काफी धर्मपरायण थी और उन्होंने सागर के साथ-साथ रहली में कई मंदिरों का निर्माण कराया था. जिनमें हरसिद्ध मंदिर रानगिर, टिकीटोरिया मंदिर, पंढरीनाथ मंदिर और जगदीश मंदिर प्रमुख हैं.'
मंदिर में विशेष आस्था रखने वाले प्रभात चौरसिया ने पंच देवो में विराजमान महादेव की महिमा का महत्व बताया