अंधविश्वास पर विज्ञान की जीत, चार पैर वाली बच्ची का सफल ऑपरेशन, अब अपने पैरों पर चल रही नंदिनी !
अंधविश्वास पर विज्ञान की जीत, चार पैर वाली बच्ची का सफल ऑपरेशन, अब अपने पैरों पर चल रही नंदिनी !
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले की कुरवाई तहसील के ग्राम जौनपुर में जन्मी एक दुर्लभ शारीरिक विकृति वाली बच्ची, जिसे चार पैर थे, अब सफल ऑपरेशन के बाद चलने-फिरने में सक्षम हो गई है। बच्ची के माता-पिता, फूल सिंह और धनुष बाई, ने समाज की हर बाधा को पार करते हुए अपनी बेटी को स्वस्थ जीवन देने का संकल्प लिया। अक्टूबर 2023 में जन्मी इस बच्ची के शरीर पर दो अतिरिक्त पैर थे, जिससे गांव में अंधविश्वास और भ्रामक धारणाएँ फैलने लगीं। कुछ लोगों ने बच्ची को मार डालने तक की सलाह दी, लेकिन उसके माता-पिता ने हार नहीं मानी और बच्ची को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। बच्ची की अनोखी शारीरिक स्थिति को लेकर स्थानीय मीडिया ने इसे प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद विदिशा कलेक्टर उमाशंकर भार्गव ने मामले को संज्ञान में लिया और भोपाल एम्स में बच्ची के इलाज की व्यवस्था करवाई।
भोपाल एम्स में बच्ची के दो सफल ऑपरेशन किए गए, जिससे उसके शरीर से दो अतिरिक्त पैर हटा दिए गए। अब वह सामान्य बच्चों की तरह चलने-फिरने में सक्षम हो गई है। डॉक्टरों के अनुसार, पूरी तरह से स्वस्थ होने के लिए अभी तीन और ऑपरेशन बाकी हैं, जिनमें गुदाद्वार और मूत्र मार्ग को सामान्य बनाने के लिए सर्जरी शामिल है। बेटी के चलने-फिरने लायक होने पर फूल सिंह और धनुष बाई ने मीडिया, प्रशासन और डॉक्टरों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपनी बेटी का नाम नंदिनी रखा है और कहा कि यह चमत्कारिक बदलाव उनकी उम्मीद और संघर्ष की जीत है। गाँव में जन्म के समय अंधविश्वास और गलत धारणाओं के कारण लोगों ने बच्ची को अशुभ कहकर उसे त्यागने या मारने तक की सलाह दी थी, लेकिन माता-पिता ने समाज की बातों को नजरअंदाज कर बेटी को बचाने और उसका इलाज कराने का कठिन निर्णय लिया।
उनकी इस हिम्मत ने न सिर्फ नंदिनी को एक नई जिंदगी दी, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया। भोपाल एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची पूरी तरह स्वस्थ हो सकती है, लेकिन इसके लिए तीन और ऑपरेशन आवश्यक हैं। आने वाले महीनों में उसकी अगली सर्जरी की जाएगी, ताकि वह बिना किसी परेशानी के सामान्य जीवन जी सके। यह मामला समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश भी देता है कि किसी भी कठिन परिस्थिति में धैर्य और सही मार्गदर्शन से समाधान संभव है। माता-पिता का अडिग विश्वास और प्रशासन व डॉक्टरों की मदद ने एक असंभव से लगने वाले मामले को सफल बना दिया।