Sagar- अंग्रेजो के जमाने से चली आ रही देवलचोरी रामलीला में, रविवार को सीता स्वयंवर
बुंदेलखंड की सबसे प्राचीन रामलीला सागर के देवलचोरी की रामलीला है। रामलीला का यह 120 वां साल है। प्रतिवर्ष बसंत पंचमी से यह रामलीला शुरू होती है जो एक हफ्ते तक चलती है। शनिवार को रामलीला में पुष्प वाटिका की लीला का मंचन हुआ। मुनि विश्वामित्र की आज्ञा से राम लक्ष्मण दोनों भाई जनक वाटिका में गुरु पूजन के लिए पुष्प लेने पहुंचते हैं जनक वाटिका के बाहर राम -लक्ष्मण और मालियों के बीच रोचक संवाद होता है माली भगवान से माता जानकी की जय बोलने के बाद वाटिका में प्रवेश की शर्त रखते हैं लक्ष्मण तो मां जानकी की जय बोल देते हैं
लेकिन प्रभु राम जय बोलने तैयार नहीं होते लेकिन मालियों की हठ के बाद भगवान राम भी जानकी मां की जय बोलते हैं और वाटिका में पहुंचकर पुष्प तोड़ते हैं। जिस समय भगवान राम लक्ष्मण जनक वाटिका में पुष्प तोड़ रहे होते हैं इसी समय माता जानकी भी सखियों के साथ गौरी पूजन के लिए वाटिका पहुंचती है, भगवान राम को देख सखिया उनकी आलोकिक सुंदरता का बखान करती है, मां गौरी का पूजन कर सीता जैसी है उनको प्रणाम करने झुकती है तो फूल माला उनके सिर पर गिरती है और इसी समय आकाशवाणी होती है मां गौरी आशीर्वाद देती है कि सीता तुमने वर को लेकर जो मन में कामना की है वह पूरी होगी।
वही रामलीला में रविवार को सीता स्वयंवर की लीला का मंचन होगा। यह रामलीला का मुख्य आयोजन है इस दिन विशाल धनुष को देखने आसपास के गांव व कई शहरों के लोग भी रामलीला देखने ग्राम देवल चोरी पहुंचते हैं रविवार को दोपहर 3:00 से रामलीला का मंचन शुरू होगा।