खुरई पहुंचे शंकराचार्य ने राजनीति पर ये क्या कह दिया सुनिए
सागर जिले के खुरई में द्वारका शारदा पीठ के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज धर्म सभा को संबोधित करने के लिए पहुंचे इसके पहले नगर के प्रमुख मार्गो से उनकी शोभायात्रा निकाली गई जिसमें जगह-जगह स्वागत हुआ, इसमें सैकड़ो लोग शामिल हुए, पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे के द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के साथ ब्राह्मण समाज अध्यक्ष राजेश मिश्रा, युवा अध्यक्ष मनोज चौबे सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
धर्मसभा में शंकराचार्य महाराज ने कहा कि हिंदू के बिना हिंदुत्व की रक्षा नहीं की जा सकती। सनातन धर्म मानने वालों को अपने बच्चों के मन में धर्म का भाव जगाना होगा। धर्म सोते हुए बालक के समान है। उसे जागृत करने की जरूरत है। वह हम सब में विद्यमान है, बस उसको जगाने की जरूरत है। धर्म का प्रकाश समाज के लोग अपने बच्चों को बचपन से दें। उनके हृदय में सनातनी संस्कारों का मोल प्रतिष्ठापित करें। अगर बचपन से ही हिंदू समाज इतना कर पाने में सफल रहा तो बच्चे आगे चलकर दिग्भ्रमित नहीं होंगे। आगे कहा कि सनातन धर्म मूल रूप से आध्यात्म वादी है। आध्यात्मिक विद्या का आश्रय लेने वाले व्यक्ति को काम, क्रोध, लोभ, अहंकार, आदि मनोविकार नहीं व्याप्ते। अहंकार दूर करने परमात्मा अवतार लेते हैं। न केवल मनुष्य वरन इंद्र आदि देवताओं के अहंकार का नाश करने परमात्मा प्रकट हो जाते हैं। प्रत्येक हिन्दू घर में रामायण, गीता सहित अन्य ग्रन्थ होना चाहिए और समय निकलकर उन्हें पढ़ना चाहिए । एक ही ग्रन्थ पढ़ लीजिए उसकी में सभी ग्रंथों का सार है, इसलिए कोई भी एक ग्रंथ को पढ़ना शुरू कर दीजिए। स्कूल कॉलेजों में संस्कार नहीं सिखाए जा रहे हैं। आज जो खुरई वासियों ने स्वागत किया है वह मेरा नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति का स्वागत किया है।
सदानंद सरस्वती ने कहा कि कुछ नेताओं के कारण, राजनीति को लोग दूषित समझने लगे हैं। राजनीति एक पवित्र शब्द है, जिसमें नीति शब्द का मतलब धर्म होता है। नेता अगर धार्मिक हो जाए तो उसके साथ चलने वाली प्रजा स्वाभाविक रूप से धार्मिक हो जाएगी। एक बार और आपको बता दें महाकुंभ में किसी को नियंत्रण नहीं दिया गया है, लोग अपने आप की कुंभ पहुंचा है। इसलिए सनातन धर्म सभा में सभी को आना चाहिए ।