Sagar-प्रदेश में यूरोप और एशिया के गिद्धों का डेरा,4 हजार किलोमीटर का सफर तय कर आए प्रवासी मेहमान
प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व नौरादेही में इन दिनों यूरोप और एशिया के गिद्धों का जमावड़ा है। यहां बाघों के साथ भारतीय भेडियों, गिद्धों और कई तरह के पशु पक्षी देखे जा सकते हैं।
यहां बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं, जो सर्दियों के मौसम में आकर्षण का केंद्र होते हैं। एशिया के देशों के अलावा यूरोपियन देशों से कई तरह के पक्षी आते हैं। इनमें सबसे ज्यादा जमावडा यहां पर गिद्धों का लगता है। सर्दी के मौसम में यहां करीब सात प्रजातियों के गिद्ध आ गए हैं। इनमें हिमालय के आसपास के अलावा यूरोपियन देशों से 3 से 4 हजार किलोमीटर का सफर तय करके आ रहे हैं।
इस बार भी इन प्रवासी पक्षियों का नौरादेही पहुंचना शुरू हो गया है। ये टाइगर रिजर्व के तालाब और नदियों के कुंड के आसपास आसानी से देखे जा सकते हैं। अभयारण्य में जगरासी खेडा, छेवला और जगतराई तालाब है। व्यारमा और बामनेर नदी के कुंड या तालाब नुमा संरचनाओं के आसपास इनको आसानी से देखा जा रहा है
कुछ पक्षी तो 3 से 4 हजार किलोमीटर सफर तय करके यहां आ रहे हैं। यहां सात तरह के गिद्धों के अलावा हरियाणा में पाई जाने वाली वुली नेक्ड स्टार्क के अलावा पेंटेड स्टार्क (सारस) भी देखे जा रहे हैं। इसके अलावा ब्लैक स्टार्क तो प्रजनन के लिहाज से पहुंचते हैं और तालाब और नदी किनारे के पेडों को अपना ठिकाना बनाते हैं।
नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ एए अंसारी ने बताया कि कि नौरादेही में तीन बडे तालाब है, इनमें हर साल प्रवासी पक्षी आते हैं। यहां जगरासी खेडा तालाब, छेवला तालाब और जगतराई तालाब है। इसके अलावा नदियों में जो कुंड या तालाबनुमा संरचना है। उनके आसपास भी प्रवासी पक्षी हैं।
इनका आना शुरू हो गया है यहां पर सात प्रजातियों के गिद्ध देखे जा सकते हैं। 4 यहां के स्थाई निवासी है और तीन प्रकार के गिद्ध बाहर से आए हैं। उसमें हिमालयन ग्रिफान, यूरेशियन ग्रेफान और सिनेरियस वल्चर है। ये अभी बडी संख्या में देखे जा रहे हैं। यहां ईकोसिस्टम बहुत अच्छा