Sagar-3 बार मिली निराशा, रिश्तेदारों ने मारे ताने,अधिकारी बना किसान का बेटा, शरद के संघर्ष की कहानी
सागर में किसान के बेटे शरद तिवारी की कहानी संघर्ष, मेहनत और सफलता की मिसाल है। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास से एमपीएससी 2022 की परीक्षा पास की और शिक्षा विभाग में सहायक संचालक के पद पर चयनित हुए। 27 वर्षीय शरद ने यह सफलता अपने सपनों और माता-पिता के संघर्ष को सामने रखते हुए हासिल की।
शरद ने इंदौर में रहकर सेल्फ-स्टडी की, क्योंकि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। खुद का खर्च चलाने के लिए उन्होंने कोचिंग के नोट्स चेक करने का काम भी किया। शरद का यह सफर आसान नहीं था। उन्होंने चौथे प्रयास में यह परीक्षा पास की, जबकि पहले तीन प्रयासों में सफलता हाथ नहीं लगी। 2019 का परीक्षा परिणाम पेंडिंग है, 2020 में मेंस क्लियर नहीं हो पाया 2021 में भी इंटरव्यू तक पहुंचे, , लेकिन फाइनल सिलेक्शन नहीं हुआ।
2022 में शरद को खुशी मिली जब परीक्षा परिणाम में उनका नाम आया और उनका चयन शिक्षा विभाग में सहायक संचालक के पद पर हुआ।
शरद के माता-पिता, मनोज और अनीता तिवारी, बंडा क्षेत्र में छोटे किसान हैं। उनका यह संघर्षपूर्ण सफर पूरे सागर जिले के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। आज शरद की सफलता पर न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि पूरा सागर जिला गर्व महसूस कर रहा है।
तैयारी करने वाले छात्रों को उन्होंने पढ़ाई में निरंतरता बनाये रखने, सेल्फ स्टडी करने का महत्व बताया है।