कैबिनेट बैठक में उज्जैन सड़कों के लिए करोड़ों की मंजूरी,दो दिग्गज मंत्री फैसले पर भड़के
मध्य प्रदेश की कैबिनेट बैठक में दो वरिष्ठ मंत्री सीएम मोहन यादव से भिड़ गए. पूरा वाद विवाद २३ सौ 12 करोड़ रुपये की सड़कों के निर्माण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान हुआ. ये सड़कें सिंहस्थ महापर्व 2028 के लिए प्रस्तावित हैं. नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि सारा पैसा उज्जैन में ही खर्च किया जाएगा, तो प्रदेश के अन्य क्षेत्रों का क्या होगा?
उन्होंने सुझाव दिया कि इन सड़कों का निर्माण बीओटी यानि बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर मॉडल पर किया जाए, जिससे खर्च की भरपाई टोल से हो सके। वहीं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने भी निर्माण की उच्च लागत पर सवाल उठाते हुए पूछा, इन सड़कों की इतनी लागत क्यों है?
मामले पर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने स्पष्ट किया कि, इन सड़कों का निर्माण सिंहस्थ महापर्व को देखते हुए किया जा रहा है, ताकि उज्जैन में यातायात को बेहतर बनाया जा सके और सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो। उन्होंने बताया कि सरकार इन सड़कों के निर्माण के बाद टोल के माध्यम से खर्च की भरपाई करेगी, साथ ही सड़क के दोनों ओर इंडस्ट्रियल टाउनशिप भी बनाई जाएंगी, जिससे लैंड पुलिंग से भी राजस्व मिलेगा।
वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सिंहस्थ फंड का कुल बजट केवल 500 करोड़ रुपये है, और इस राशि से तीन बड़ी सड़कों का निर्माण संभव नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि यदि सिंहस्थ का बजट बढ़ाने की आवश्यकता हुई, तो वे केंद्र सरकार से बातचीत करेंगे। मुख्यमंत्री के इस उत्तर के बाद, मामले में कुछ और स्पष्टता आई और बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
दरअसल सिंहस्थ महापर्व 2028 के लिए उज्जैन में सड़कों के निर्माण से शहर को क्राउडेड होने से बचाया जा सकेगा और यातायात के दबाव को कम किया जा सकेगा। इन सड़कों से उज्जैन और अन्य क्षेत्रों के बीच संपर्क बेहतर होगा, जिससे शहर में आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को सुविधा होगी।