Sagar- जब थानेदार ही विधायक की बात ना सुने तो ऐसी विधायकी किस काम की यह लो इस्तीफा..
मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में उसके अपने ही विधायक इतने असहाय हो गए, कि उन्हें अपनी सुनवाई करवाने के लिए थाने में थानेदार के सामने इस्तीफा लिखना पड़ रहा है, समर्थकों के साथ धरने पर बैठना पड़ रहा है, जिंदाबाद मुर्दाबाद के नारे लगाने पड़ रहे है, जब लाखों की जनता के द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि का यह हाल है तो उस आम जनता की सुनवाई कितनी होती होगी, जो आशा से लबरेज होकर कार्यालय के चक्कर पर चक्कर काटती रहती है, इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं, यह मामला राजनीति से नहीं बल्कि डॉक्टर की रिश्वत और भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है, यह मामला उस नेतृत्व से जुड़ा हुआ है जिस पर जनता ने भरोसा कर इस पद पर बैठाया हैं.
दरअसल सागर जिले के देवरी विधानसभा से भाजपा विधायक बृज बिहारी पटेरिया रिश्वत मांगने वाले एक डॉक्टर के खिलाफ थाने में मामला दर्ज करवाना चाह रहे थे, उन्होंने थानेदार से बात की एसपी से बात की तो कई तरह के नियम कानून उनके लिए बता दिए गए इस पर विधायक ने कहा कि जब एक चुने हुए जनप्रतिनिधि के खिलाफ मामला दर्ज हो सकता है तो सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ क्यों नहीं, और अगर जब सत्ता पक्ष की विधायक की ही बात एक अदना सा थानेदार ना सुने तो इससे शर्म की बात कुछ और हो नहीं सकती मैं अपना पेट भरने के लिए विधायक नहीं बना हूं जनता की सेवा करने के लिए बना हूं और जब जनता का काम नहीं कर पाऊं तो फिर यह विधायकी किस काम की,
हालांकि यह सिर्फ देवरी विधानसभा की बात नहीं है इससे ठीक 48 घंटे पहले सतना की मऊगंज से विधायक प्रदीप पटेल एडिशनल एसपी के कक्ष में दंडवत हो गए थे उनका कहना था कि पूरा जिला नशा की चपेट में है आप मुझे गुंडो से मरवा दीजिए जबलपुर के पाटन से विधायक अजय बिश्नोई ने भी इस बात का समर्थन कर अफसर शाही पर सवाल खड़े करते हुए अपनी ही सरकार को घेरा उन्होंने कहा कि शराब माफियाओं के आगे पूरी सरकार दंडवत है
तो वही सागर जिले की ही नरयावली विधानसभा की चार बार के विधायक प्रदीप लारिया अपने विधानसभा क्षेत्र में बिक रही अवैध शराब के खिलाफ लंबे समय से मोर्चा खुले हुए हैं करीब 5 बार वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन दे चुके चक्कर पर चक्कर लगा रहे लेकिन पुलिस अवैध नशे के खिलाफ लगाम नहीं लग पा रही है कटनी के राघोगढ़ से विधायक संजय पाठक भी अपनी जान को खतरा बता चुके हैं