सागर - पितृ मोक्ष अमावस्या पर करें यह महा उपाय, दूर होगी हर समस्या, जानिए सब कुछ पंडित से
पितृपक्ष का समापन 2 अक्टूबर बुधवार को पितृमोक्ष अमावस्या पर होगा। सागर में पितृपक्ष में बीते 14 दिन से शहर की झील के किनारे घाटों पर सुबह जल तर्पण का क्रम जारी है। चकराघाट, चतुर्भुज, भट्टों घाट, बाबा घाट सहित विभिन्न स्थानों लोग अपने पूर्वजों को पंडितों के मार्गदर्शन में जल तर्पण कर रहे हैं। अमावस्या को तर्पण के साथ ही दीपदान का विशेष महत्व रहता है। चकराघाट पर 29 साल से तर्पण करवा रहे पं यशोवर्धन प्रभाकर नारायण चौबे ने बताया कि पितृमोक्ष अमावस्या पर ऐसे सभी लोग तर्पण कर सकते हैं जिनको अपने पूर्वजों की तिथि का ज्ञान नहीं है या फिर अंतिम संस्कार तक भी न हो सका हो। अथवा किसी भी तरह से पूर्वजों को लेकर जानकारी अज्ञात हो तो भी अमावस्या पर किया गया पिंडदान और तर्पण मोक्षदायी माना जाता है।
पं चौबे ने बताया कि अमावस्या पर कुशाओं की गांठ खोलकर पिट्टों के लिए दही, शहद और पेड़ा का अर्पण किया जाता है। अमावस्या पर गुणानुदोष होता है। इसलिए मीठे और खट्टे का मिश्रण कागोर निकाली जाती है। इसको आदि व्याधि स्वरुप कहा जाता है। उन्होंने बताया कि अमावस्या पर पितों की विदाई के लिए आटे से घर के बाहर की ओर चरण बनाए जाते हैं। पं चौबे ने बताया कि पितृमोक्ष अमावस्या पर दीपदान का भी विशेष महत्व है। प्रातः पिंडदान और शाम को दीपदान करने से पितृों की तृप्ति और मोक्ष की राह तय होती है। उन्होंने बताया कि पीपल या आंवले के वृक्ष के नीचे दीप प्रज्जवलित करना चाहिए