Sagar- 18 सितंबर से शुरू हो रहे पितृपक्ष, तर्पण करने वाले इन बातों का रखें ध्यान
Sagar- 17 सितंबर से शुरू हो रहे पितृपक्ष, तर्पण करने वाले इन बातों का रखें ध्यान
17 सितंबर से पितृपक्ष शुरू हो रहे है जो 2 अक्टूबर चलेंगे, पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है. ऐसा माना जाता है कि इससे पूर्वज खुश होते हैं और पूरे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं. यह परंपरा आदिकाल से चली आ रही है, सागर के चकराघाट पर पंडित यशोवर्धन चौबे की चार पीढ़ियां यजमानों को तर्पण कराते आ रही है, इस बार शीतला मंदिर और विठ्ठल मंदिर के पास तर्पण करवाया जाएगा, उन्होंने बताया की इन दिनों में तर्पण पिंडदान और श्राद्ध किया जाता है. पुराणों के मुताबिक पितृ पक्ष में घर-परिवार के मृत पूर्वजों को श्रद्धा से याद किया जाता है, इसे ही श्राद्ध कहा जाता है.
पिंडदान करने का मतलब ये है कि हम पितरों के लिए भोजन दान कर रहे हैं. वहीं तर्पण करने का अर्थ यह है कि हम जल का दान कर रहे हैं इस तरह पितृ पक्ष में इन तीनों कामों का महत्व है. इसके आगे उन्होंने बताया कि पितृ ऋण, देव ऋण और ऋषि ऋण से उबरने के लिए तर्पण किया जाता है पंडित यशवर्धन चौबे के मुताबिक श्राद्ध कर्म करने वाले सदस्य को इन दिनों बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए. उन्हें ब्रह्मचर्य का पालन भी करना चाहिए. किसी की अंतिम यात्रा या खारी उठावना में शामिल नहीं होना चाहिए. घर के बाहर का कुछ भी खाना पीना नहीं चाहिए.