साढ़े 7 किलो वजन की प्रतिमा तीन बार नदी में तैरती रही तो पूरा साल अच्छा जाएगा, ऐसी ही मान्यता
साढ़े 7 किलो वजन की प्रतिमा तीन बार नदी में तैरती रही तो पूरा साल अच्छा जाएगा, ऐसी ही मान्यता
डोल ग्यारस के अवसर पर शनिवार (14 सितंबर) को हाटपीपल्या नृसिंह घाट पर भगवान नृसिंह की साढ़े 7 किलो वजनी पाषाण मूर्ति भमोरी नदी में तैराई गई। जिसके बाद मूर्ति तैरने लगी। ऐसा तीन बार किया गया और हर बार मूर्ति तैरती रही। मूर्ति के तैरते ही घाट पर मौजूद हजारों लोगों ने भगवान नृसिंह के जयकारे लगाए। श्रद्धालुओं ने दोपहर में मंदिरों में पूजा-अर्चना के बाद आरती हुई। भगवान नृसिंह का ढोल-अखाड़े के साथ चल समारोह निकाला गया। शाम को हुए आयोजन को लेकर पहले से ही विशेष तैयारी की गई थी। तीन बजे से ही घाट पर श्रद्धालु जुटने लगे थे। साढ़े सात किलो की पाषाण प्रतिमा को डोल ग्यारस पर तीन बार पानी में तैराया जाता है। जितनी बार मूर्ति तैर जाती है,उससे आने वाले वर्ष का आकलन किया जाता है।
यह नजारा देखने के लिए बड़ी संख्या में हाटपीपल्या सहित आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोग घाट पर पहुंचते है। हाटपीपल्या-स्थानीय नृसिंह घाट पर हर साल की तरह इस वर्ष भी डोल ग्यारस के मौके पर शनिवार (14 सितंबर) को नृसिंह घाट पर भमोरी नदी में पानी की सतह पर साढे़ 7 किलो वजनी चमत्कारिक पाषाण प्रतिमा को तैराया गया। प्रतिमा के तैरते ही सारा वातावरण भगवान नृसिह के जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान भगवान नृसिंह को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। पहली बार में करीब एक मिनट तक पाषाण प्रतिमा तैरती रही। दूसरी और तीसरी बार में जब पाषाण प्रतिमा को पानी की सतह पर छोड़ा गया।
तो पाषाण प्रतिमा 2-2 मिनट तैरी। तीनों बार पाषाण प्रतिमा के पानी की सतह पर होने पर घाट पर मौजूद श्रद्धालु भगवान नृसिंह के जयकारे लगाते रहे। इस अद्भुत चमत्कारिक नजारे को देखने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।इस चमत्कार को देखने के लिए हजारों लोगों की भीड़ जुटती है। नृसिंह मंदिर के प्रमुख पुजारी के अनुसार, यदि भगवान की प्रतिमा एक बार तैरती है तो साल के चार माह अच्छे माने जाते हैं और यदि तीन बार तैरे तो पूरा साल अच्छा बीतता है। प्रतिमा पर हार चढ़ाने की बोली भी लगाई जाती है।