Sagar- Bihari ji reached Barsana in the guise of Maniharin to pacify angry Radha, eager to see the tableau.
Sagar- रूठी राधा को मनाने मनिहारिन भेष में बरसाना पहुंचे बिहारी जी, झाँकी के दर्शनों को ताँता
वैसे तो राधा कृष्ण की एक से बढ़कर एक लीलाएं सुनने मिलती हैं. ऐसा ही एक किस्सा राधा कृष्ण के अटूट प्रेम का है. जब रूठी राधा को मनाने भगवान कृष्ण मनहारिन के रूप में बरसाने में चूड़ियां बेचने निकल पड़ते हैं. सागर के प्रसिद्ध बिहारी जी मंदिर में राधा कृष्ण के प्रेम की अद्भुत कहानी को सावन के महीने की दूसरी एकादशी पर झांकी का रूप दिया गया है. जिनके दर्शनों को सैकड़ों की संख्या में महिलाएं रात में मंदिर पहुंचीं. महिलाओं द्वारा यहां पर स्त्री सौंदर्य की सामग्री लाई जाती है जो बिहारी जी को अर्पित की जाती है. इसमें चूड़ियां, बिंदी, बेंदी, कंगन, महाबर, दर्पण जैसी चीज़ें हैं. इस रूप में बिहारी जी के दर्शन करना महिलाओं के लिए काफी सौभाग्यशाली माना जाता है.
पुजारी महेंद्र पाराशर बताते हैं कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण और राधा जी की लीलाएं सुनकर आज भी लोगों के मन प्रसन्न हो जाते हैं. उन्हीं लीलाओं को आज भी मंदिरों में झांकी के रूप में दिखाया जाता है कि कैसे भगवान श्रीकृष्णा सखी बनकर राधाजी से मिलने बरसाना जाते थे. अलग-अलग तरह के भेष रखकर उनसे मिलने का बहाना ढूंढते थे. कभी वह राधाजी को चूड़ियां पहनाने के लिए मनिहारी का भेष रखते तो कभी वैद्य का रूप धारण कर लेते थे.
आगे बताते है की प्रेम जी महाराज और अमित पंडित जी द्वारा यह परंपरा शुरू की गई थी, जो आज भी चल रही है. यह भगवान श्रीकृष्णा और राधाजी के प्रेम को दर्शाने वाली झांकी है. साल में केवल एक दिन सावन के महीने में एकादशी पर बिहारी जी इस रूप में दर्शन देते हैं.