Sagar - Where passenger buses were stopped, school buses and city buses were running, strike continued for the eighth day sagar tv
Sagar-जहां यात्री बसें बंद की, वहीं चल रही स्कूल बसे और सिटी बसें, आठवें दिन हड़ताल जारी
सागर में यात्री बसों की हड़ताल आठवें दिन भी जारी है. जबकि शहर भर में रोजाना 250 स्कूल बसें चार बार आती और जाती हैं। तंग गलियों से लेकर वन-वे तक में ये चलती हैं। इसके साथ ही 24 सिटी बसें भी शहर में एक छोर से दूसरे छोर तक चल रही हैं। इतना ही नहीं न्यू आरटीओ से लेकर कनेरादेव- संजय ड्राइव चौराहा तक आवासीय क्षेत्र में जहां पहले बसें नहीं चलती थीं, वहां से यात्री बसें चलवाई जा रही हैं। रात में भारी वाहन, ट्रक आदि शहर से गुजरते हैं। इन सब पर प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं है।
आपत्ति है तो सिर्फ उन यात्री बसों पर जो तालाब स्थित डॉ. हरीसिंह गौर बस स्टैंड से मोतीनगर चौराहा होते हुए चलती हैं और इसी बस स्टैंड से संजय ड्राइव होते हुए कनेरादेव संजय ड्राइव चौराहा होते हुए उसी मार्ग पर पहुंचती हैं, जहां से घने आबादी क्षेत्र धर्मश्री से नए बस स्टैंड की बसों को भी चलवाया जा रहा है। प्रशासन और आरटीओ का यह दोहरा रवैया सबकी समझ से परे है।
तालाब किनारे स्थित शहर के सबसे पुराने और लोगों की आसान पहुंच के बस स्टैंड से बसों को बंद करने के पीछे प्रशासन का तर्क है कि यह जोखिम भरा मार्ग है। जबकि हकीकत यह है कि तालाब बस स्टैंड से लेकर सिविल लाइन होते हुए मकरोनिया चौराहा और संजय ड्राइव होते हुए कनेरादेव चौराहा तक करीब 50 आवासीय परिसर हैं। जबकि इसके विकल्प के रूप में आरटीओ के पास जो नया बस स्टैंड बनाया गया है, वहां से बसें चलकर ऐसे आवासीय क्षेत्र से जाएंगी, जहां से पहले बसें चलती ही नहीं थीं।
इनमें राजघाट तिराहा, तिली क्षेत्र की कई पॉश कॉलोनियों से लेकर ग्वालीपुरा, सिरोंजा, मकरोनिया का ऐसा क्षेत्र जहां पहले बसें नहीं चलती थीं, वह एरिया भी शामिल है। ऐसे में ऐसा कौन सा पैरामीटर है जिसमें यहां के लोगों की जान की फिक्र न करते हुए सिर्फ पुराने रूट के लोगों की ही की जा रही है। नए रूट के लोगों की जान को जोखिम में डाला जा रहा है।