Big decision of the court came before the Sagar bus strike, a shock to the operators, this time the administration is in no mood for leniency.
सागर में तालाब के सामने स्थित प्राइवेट और मुख्य बस स्टैंड के ट्रांसफर को लेकर दायर की गई अपील को मप्र हाईकोर्ट जबलपुर की डबल बैंच ने खारिज कर दिया है। बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद ही बस ऑपरेटर्स ने हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। दूसरी ओर जिला प्रशासन इस दफा किसी तरह की नरमी बरतने के मूड में नहीं है।
जानकारी के अनुसार बस ऑपरेटर्स की ओर से विमलसिंह ठाकुर नाम के एक व्यक्ति ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायाधीश विनय सराफ की डबल बैंच में पिछले दिनों एक अपील दाखिल की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि, राज्य सरकार की तरफ से जिला प्रशासन ने दोनों पुराने बस स्टैंड्स को न्यु आरटीओ और लेहदरा नाका के पास शिफ्ट कर दिया है। इससे आम नागरिकों समेत बस संचालकों को भी परेशानी हो रही है।
यात्रियों के लिए इन नए स्टैंड्स पर पीने का पानी, भोजन और रुकने की व्यवस्था का इंतजाम नहीं है। जवाब में मप्र सड़क परिवहन प्राधिकरण और सरकार की ओर मौजूद वकील एसएस चौहान और अंशुमानसिंह ने बैंच को अवगत कराया कि उपरोक्त कमियों को दूर किया जाएगा। हाईकोर्ट ने उक्त जवाब को संतोषजनक मान रिकॉर्ड पर लेते हुए यह अपील खारिज कर दी।
एक प्रशासनिक अधिकारी का कहना है कि ऑपरेटर्स, हाईकोर्ट में जनहित की तो बात कर रहे हैं। लेकिन वास्तव में वह जनता के हित के बारे में कितना सोचते हैं। इसकी बानगी उनके द्वारा प्रस्तावित हड़ताल है। जबकि उन्हें यह अच्छी तरह से मालूम है कि इस महीने रक्षा बंधन जैसा त्योहार है।
माता- बहनों समेत अन्य को एक स्थान से दूसरे स्थान आना जाना होगा। इसके बावजूद वह उनकी परिस्थितियों पर गौर करने के बजाए बस ऑपरेटर्स द्वारा शासन प्रशासन पर दबाव बनाया जा रहा है। इस बारे में कलेक्टर दीपक आर्य का कहना है कि हड़ताल से सख्ती से निपटा जाएगा। जनता को किसी भी स्थिति में परेशान नहीं होने देंगे। यहां बता दें कि बस ऑपरेटर्स ने दो दिन बाद 5 अगस्त से बसों का संचालन बंद कर हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है।