Children studying in schools are facing problems, at some places water is filled and at other places there is problem of water dripping.
एमपी के दमोह जिले की प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं में बच्चे स्कूल पहुंचने लगे हैं। लेकिन जिले में शुरू हुई नए शैक्षणिक सत्र की पहली बारिश के साथ आई तस्वीर इनके सामने स्कूलों की बदहाली को सामने ला रही है जिले के स्कूलों की बात करें। तो बारिश मे 55 प्रतिशत से अधिक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के बच्चे खतरे के बीच शिक्षा ले रहे है।
शासकीय स्कूलों का यह रिकॉर्ड चोकाने वाला ही है। कि जिले में 1595 शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल दर्ज है। जिनमें से 846 स्कूल ऐसे हैं। जिनमें मरम्मत की आवश्यकता है ,इन स्कूल के प्रभारियों ने बकायदा वार्षिक कार्ययोजना में इस बात का उल्लेख किया है। और मरम्मत के लिए राशि की मांग भी शासन से की है। खास बात यह है कि इस संख्या में 150 से अधिक स्कूल भी बताए जाते हैं। जिनमें मेजर मरम्मत की आवश्यता बताई जाती है। बारिश में मौसम में इन स्कूलों में कक्षाएं लगाना खतरे से भी खाली नहीं है।
लेकिन अभी तक मरम्मत के लिए राशि की व्यवस्था नहीं हो सकी है। जब हमने दमोह शहर के कुछ स्कूलों का भ्रमण किया तो वहां की स्थिति देखकर चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। स्कूल भवनों में छप्पर गिरने दीवार गिरने जैसे हालात साफ तौर से देखे जा सकते हैं। जबकि दमोह शहर के मांगज वार्ड स्थित मांगज स्कूल में पानी भरने की समस्या से बच्चों को दो-चार होना पढ़ रहा है। छोटी-छोटी बच्चियों को भरे हुए पानी से संघर्ष कर जाते हुए साफ तौर से देखा जा सकता है। पानी की निकासी की व्यवस्था न होने के चलते हुए यहां पर जल भराव की स्थिति बन जाती है। इसको लेकर यहां के शिक्षक अपने वरिष्टों को उसकी जानकारी देते रहते हैं। वही शिवाजी प्राथमिक शाला की छत काफी कमजोर हो चुकी है।
बिल्डिंग काफी पुरानी होने की वजह से दिवाली एवं छत गिरने की स्थिति में आ चुकी हैं। यहां के शिक्षकों ने इसकी जानकारी विभाग को दी है। लेकिन अभी तक स्कूल में किसी प्रकार की मरम्मत का काम नहीं किया गया है। जिससे यहां पर पढ़ने वाले बच्चों पर खतरा हमेशा मंडराता रहता है। वहीं दमोह नगर पालिका स्थित जवाहर प्राथमिक शाला की बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है।
साथ ही बाउंड्री वॉल ना होने की वजह से यहां पर बच्चों एवं शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सभी स्कूलों के शिक्षकों के द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों एवं विभाग को ऐसे स्कूलों के द्वारा अपनी जानकारी भेज दी गई है। लेकिन नए सत्र चालू होने के बाद भी इन स्कूलों पर विभाग के द्वारा अभी तक किसी भी कार्य का सुधार कार्य नहीं किया गया है। अब देखना होगा कि नया सत्र चालू होने के बाद खराब हो चुके स्कूलों में विभाग कब तक काम करता है।