Sagar - Crowd gathered to have darshan of Jagannath Swami in Rath Yatra, enthusiasm was seen among the devotees to pull the chariot.
स्वास्थ्य होने के बाद आषाढ़ शुक्ल पक्ष दोज को जगत के पालनहार भगवान जगनाथ बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलदाऊजी के साथ रथ में सवार होकर जनदर्शन के लिए निकले। सागर शहर में 12 से अधिक स्थानों पर रथ यात्राएं निकाली गई। दोपहर से शुरु हुआ भ्रमण का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। बड़ा बाजार क्षेत्र से फिर छोटे वृंदावन के स्वरूप में नजर आया। सबसे अधिक रथयात्राएं यहीं से निकाली गई। भगवान का रथ खींचने के लिए भक्तों में होड़ लगी रही। 15 दिन बाद भगवान को मालपुओं का भोग लगाया गया। जिले में गढ़ाकोटा में भी भव्य रथयात्रा निकाली गई। प्रमुख रुप से शहर के श्री देव वृंदावन बाग मंदिर, श्रीदेव रामबाग मंदिर, श्री देव अटलबिहारीजी मंदिर, श्री देव राधामाधव गेड़ाजी मंदिर, श्रीजगमोहनलाल जी मंदिर, श्री बांके बिहारीजी साहू समाज मंदिर, श्रीगोपालजी मंदिर काकागंज, श्रीदेव रामजानकी मंदिर, परकोटा झील मंदिर, राधाकृष्ण मंदिर सेन समाज विजय टाकीज सहित अन्य मंदिरों से रथयात्राएं निकाली
शहर के सबसे पुराने मठ श्री देव वृंदावन बाग मंदिर से गौकूल बेला में रथ यात्रा शुरु हुई। करीब 160 साल से चली आ रही यहां की परंपरा में लकड़ी से बने रथ को गुलाब और मोगरा के फूलों से सजाया गया। भगवान जगन्नाथजी बहन सुभद्रा और बलदाऊजी के साथ रथ में विराजमान हुए। रथ यात्रा में हाथी, घोड़े, बैंड बाजा के साथ भक्त रथ खीचते हुए शामिल हुए। डमरु दल ने आकर्षक प्रदर्शन किया। रास्ते में ठाकुरजी की आरती कर नजर उतारी गई।
चकराघाट स्थित धनुषधारी मंदिर, श्रीदेव अटल बिहारी जी मंदिर से रथ यात्रा में एक रथ पर बिहारी जी सरकार एवं दूसरे रथ पर भगवान जगनाथ स्वामी, भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा के साथ विराजमान होकर भ्रमण पर निकले। पुजारी अमित चाचोदिया व विपिन गंगले ने बताया कि भगवान का जलाभिषेक कर वृंदावन से आई नई पोशाक और स्वर्ण रजत से श्रृंगार किया गया