सागर में ऑटो के ऊपर कैसे ले जा रहे चद्दर बड़ी लापरवाही
गर्मी के बाद बारिश का मौसम राहत के साथ ही आफत लेकर आता है। ग्रामीण क्षेत्रों के कच्चे घरों में बारिश के पानी से बचाव करने के लिए इन दिनों बाजारों में लोहे की चद्दर की मांग बढ़ गई है। बीना और खुरई में ग्रामीण क्षेत्रों के लोग जान जोखिम डालकर ऑटो के ऊपर चद्दर ले जाते है। इससे कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है। बारिश के मौसम की शुरुआत भले ही अभी पूरी तरीके से शुरू नहीं हुई है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बाजारों में आकर इसकी तैयारी पहले से ही करना शुरू कर दिया है।
बाजारों में लोहे की चद्दर और प्लास्टिक की तिरपाल की मांग बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोहे की चद्दर की मांग ज्यादा है। लहटवास गांव के सुखनंदन अहिरवार, दिलीप चौधरी ने बताया कि उनके कच्चे घर हैं और बारिश से पहले प्लास्टिक और लोहे की चद्दर खरीदने के लिए बाजार आए हुए हैं। अभी पूरी तरीके से बारिश भले शुरू नहीं हुई है लेकिन तैयारी तो करना ही पड़ेगी। पडरई गांव के नारायण सिंह ने बताया कि उनके चार मवेशी है। उसके लिए घर नहीं है। सूखे मौसम में तो पेड़ के नीचे बांध देते थे।
मगर अब बारिश आने वाली है। ऐसे में मवेशियों के लिए बचाव के लिए लोहे की चद्दर ही सहारा है। बीना और खुरई के बाजारों में इन दिनों लोहे की चद्दर की मांग बढ़ गई है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के लोग ऑटो के ऊपर चद्दर लेकर जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले ऑटो पहले से ही ओवरलोड सवारियां लेकर चलते हैं। वहीं ऑटो के ऊपर भी लोहे की चद्दर रखी रहती हैं। इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ऑटो के ऊपर रखी लोहे की चादर ऑटो से करीब एक से डेढ़ फीट बाहर निकली हुई रहती हैं।
इससे हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है। बसाहरी गांव के रघुवीर आदिवासी, पर्वत आदिवासी ने बताया कि बारिश के पहले कच्चे घर के लिए चद्दर लेने के लिए बाजार आए हैं लेकिन हम लोगों के पास ट्रैक्टर ट्रॉली तो है नहीं, ऐसे में कम दामों में ऑटो ही एकमात्र विकल्प होता है।