Sagar-रहली से निकली सुनार का यहां है उद्गम स्थल,बारिश में मंत्री ट्रैक्टर चलाकर देखने पहुंचे
मध्यप्रदेश सरकार के पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल जल गंगा संवर्धन अभियान में शामिल होने सागर जिले के केसली पहुंचे, जहां रहली ,पथरिया दमोह जैसे इलाकों सुख समृद्धि लती है। सागर जिले के केसली विकासखंड के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र कुल डोंगरी जाते समय रस्ते में झमाझम बारिश तो उनको आगे जाने में में परेशानी हुई तो मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल खुद ही ट्रेक्टर को चलाकर खेतो से होते ही कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे, फिर उन्होंने उद्गम स्थल पर पूरे विधि विधान से सुनार नदी माता की पूजा अर्चना की ।
उन्होंने कहा कि सुनार नदी से सागर, दमोह जिले में सुख समृद्धि आती है और हम सबको नदी के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य करना। मंत्री के साथ ट्रैक्टर पर जिला पंचायत की अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत, उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि सवार थे। कुल डोंगरी में आदिवासी नृत्य शेर की प्रस्तुति भी दी गई, बड़ी संख्या में मौजूद जनसमुदाय ने भी तालिया की गड़गड़ाहट से आदिवासी समुदाय का उत्साह वर्धन किया।
जीवन के लिए पानी जरूरी और पानी के लिए वृक्ष जरूरी इसलिए एक वृक्ष जरुर लगाएं जल स्त्रोतों के जल संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए एकजुट होना होगा। उक्त विचार पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने सागर जिले के देवरी विकासखण्ड के व्यारमा नदी के उद्गम स्थल पर भरईनाला जनपद पंचायत देवरी सागर में जल गंगा संवर्धन अभियान पर स्थानीय जनसमुदाय से चर्चा और वृक्षारोपण एवं तीतरपानी-महाराजपुर बायापास-रसेना-सहजपुर-केसली सुनार नदी के उद्गम स्थल, खैरा की पहाड़ी, ग्राम घाना, जनपद पंचायत केसली, सागर में जल गंगा संवर्धन अभियान पर स्थानीय जनसमुदाय से चर्चा और वृक्षारोपण“ कार्यक्रम में व्यक्त किए।
पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुसार जल नमामि गंगे अभियान में प्रदेश में जल स्त्रोतों तथा नदी, तालाबों, कुओं, बावड़ियों तथा अन्य जल स्त्रोतो के जल संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिये 16 जून तक विशेष अभियान संचालित किया जाएगा। हम अपने पुरखों के अनुभव और उनके दूरदर्शी विचारों पर गौर करें। गंगा दशहरा के पहले किसान बंधु मेढ़ बंधान एवं खेती किसानी के लिये जो आवश्यक तैयारियां करना है वो पहले कर लेते हैं। क्योंकि उन्हें मालूम है कि बरसात आयेगी, तब हम कुछ नहीं कर पायेगें। यह हमारे पुरखों- बुजुर्गों की सोच थी। हमें भी अपनी भावी पीढ़ी के बारे में सोचना होगा।