सागर-शादी के 10 साल बाद...2 बच्चों की मां बनी शूटर,अब नेशनल लेवल पर साधेंगी निशाना,जानें इनका सफर
कहते हैं मन में अगर ललक हो तो सीखने की कोई उम्र नहीं होती है, ऐसा ही हुआ है सागर में जहां शादी के 10 साल बाद दो बच्चें होने के बावजूद एक मां को बचपन का सपना पूरा करने का मौका मिला तो न सिर्फ उन्होंने अपने उसे शौक को पूरा किया बल्कि अपनी लगन मेहनत और समर्पण की वजह से उनका चयन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हो गया है,
बात सागर के बीएमसी कैंपस में रहने वाली प्रतिभा सिंह की है जिन्होंने पिस्टल शूटिंग राष्ट्रीय प्रतियोगिता में क्वालीफाई किया है, नवंबर दिसंबर में आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में भी गोल्ड मेडल के लिए खेलेंगी.
बता दें कि पिछले दिनों 21 मई से 27 मई तक आर्मी मार्कमेन शिप यूनिट महू में ओपन इंडिया नेशनल पिस्टल प्रतियोगिता अयोजित की गई थी. प्रतिभा सिंह ने इसमें हिस्सा लेकर आल इंडिया NARI महिला वर्ग में 14th रैंक हासिल की है, जिसमे देश के सभी राज्यों से शूटिंग खिलाड़ियो ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था. इसी के बाद उनका राष्ट्रीय स्तर पर चयन किया गया है.
हालांकि यहां तक पहुंचने में उन्होंने काफी संघर्ष भी किया है. क्योंकि स्टेट क्वालीफाई होने के बाद प्री नेशनल ओपन पिस्टल प्रतियोगिता में पश्चिम बंगाल के आसनसोल, दिल्ली और हैदराबाद में भी हिस्सा लिया था, लेकिन अच्छे स्कोर नहीं मिले थे जिसकी वजह से वह आगे नहीं बढ़ पा रही थी यहां उन्होंने हार मानने की बजाय और मेहनत करना शुरू किया अभ्यास का समय 2 घंटे से बढ़ाकर ढाई घंटे कर दिया, और ज्यादा एकाग्र होकर निशाना साधने लगी.
दरअसल सागर बी.एम.सी. केम्पस में रहने वाली 34 वर्षीय प्रतिमा सिंह की 10 साल पहले डॉ अजय सिंह से शादी हुई थी. इसके बाद उनके परिवार में दो नन्हे मेहमानों की एंट्री हुई, जिसमें दो प्यारी सी बेटियों ने जन्म लिया, इनमे बड़ी बेटी की उम्र 9 साल और छोटी बेटी की उम्र 5 साल है. साल 2020 में लॉकडाउन के समय अजय सिंह सागर आ गए, जो मेडिकल कॉलेज में एनेस्थीसिया विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर और डॉक्टर हैं. प्रतिमा के मायके में दुनाली थी.
जिसे देखकर उन्हें शूटिंग में जाने का शौक था. लेकिन कभी ऐसा अवसर नहीं मिल पाया, सागर आने के बाद उनको यहां पर डॉक्टर मोहम्मद एजाज खान के द्वारा संचालित होने वाली सागर डिस्ट्रिक्ट राइफल शूटिंग अकादमी के बारे में जानकारी लगी डेढ़ साल पहले उन्होंने अपने बचपन के शौक को पूरा करने के लिए से ज्वाइन किया, लगातार प्रैक्टिस की वजह से वह अच्छी निशानेबाज बन गई