सागर में पहली बार अब हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर, सैटेलाइट, ड्रोन, और स्पेसक्राफ्ट डिजाइन की पढ़ाई
सागर के डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय ने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू कराई है. एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग शुरू होने के बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि अब पिछड़े बुंदेलखंड के बच्चे भी हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर, सैटेलाइट, ड्रोन और स्पेसक्राफ्ट डिजाइन करना सीखेंगे. कुल आठ सेमेेस्टर के इस कोर्स का पहला बैच 2027 में निकलेगा. प्रबंधन का कहना है कि सातवें सेमेस्टर से ही कैंपस बुलाना शुरू कर दिया जाएगा और शत-प्रतिशत विद्यार्थियों को प्लेसमेंट देने का प्लान है.
एक एयरोनॉटिकल इंजीनियर का काम सुरक्षित और फ्यूल एफिशिएंट मशीनों को डिजाइन करना, उन्हें विकसित करना और बनाना जो कि हवा में या स्पेस में उड़ सकें. इसमें हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर, सैटेलाइट, मिसाइल्स, ड्रोन, और स्पेसक्राफ्ट आदि हो सकते हैं.
एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद युवाओं के पास रोजगार के अपार अवसर होंगे. वे कोर्स पूरा कर विमानन और एवियोनिक्स, फ्लाइट मैकेनिक्स, इंजीनियर, एयरक्राफ्ट इंजीनियर, एयरक्राफ्ट प्रोडक्शन मैनेजर, एयर सेफ्टी ऑफिसर आदि के रूप में काम कर सकते हैं.
विश्वविद्यालय के अनुसार देश में प्रतिवर्ष 8-10 हजार एयरोनॉटिकल इंजीनियर स्नातक पास होते हैं. इसमें 60 प्रतिशत इंजीनियर दक्षिण भारत के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के होते हैं. बुंदेलखंड में यह पहली बार है जब विश्वविद्यालय ने इस प्रकार के रोजगार मूलक कोर्स शुरू किए हैं. विश्वविद्यालय की मीडिया अधिकारी प्रोफेसर विवेक जायसवाल ने बताया
By - sagar tv news
06-Jun-2024