सागर-गर्मी में पीले सोने की खेती कर किसान हो रहे मालामाल, कम लागत में अधिक मुनाफा
एक समय था कि बुंदेलखंड की पहचान एक सूखाग्रस्त इलाके के रूप में थी, लेकिन धीरे-धीरे वक्त बदल रहा है और बुंदेलखंड में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के चलते किसान एक प्रगतिशील किसान के रूप में आगे बढ़ रहा है. इसका सबसे अच्छा उदाहरण गर्मी के सीजन में देखने मिल रहा है, सागर में किसानों द्वारा बड़े पैमाने पर सोयाबीन की बुवाई की गई है. पीले सोना के नाम से वर्षा कालीन फसल गरमी के मौसम में बोकर किसान मोटी कमाई कर रहा है.
सोयाबीन की फसल के लिए सिंचाई की जरूरत होती है. ऐसे में गर्मी के मौसम में सोयाबीन उत्पादन कर बुंदेलखंड का किसान अपनी तरक्की का संदेश दे रहा है. सागर जिले में ही करीब 500 हेक्टेयर में किसानों ने इस बार सोयाबीन की फसल बोयी है. किसानों की माने तो अच्छा बीज होने पर 8 से 10 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन होता है. हालांकि सिंचाई की जरूरत भी 8 से 10 बार पड़ती है और जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन हैं, वह गर्मी में भी सोयाबीन यानी पीला सोना लगाकर मालामाल हो सकते हैं.
किसानों का कहना है कि 'पिछले साल कुछ किसानों ने ब्लैक गोल्ड किस्म का बीज सोयाबीन का लगाया था, जो गिरी हालत में एक एकड़ में 8 से 10 क्विंटल सोयाबीन का उत्पादन दे रहा है.' किसानों का कहना है कि 'सोयाबीन के दूसरे बीज उच्च तापमान नहीं सह पाते हैं, लेकिन ब्लैक गोल्ड उच्च तापमान आसानी से सह लेता है.
कृषि विभाग के सहायक संचालक जितेंद्र सिंह राजपूत का कहना है कि इस बार लोगों ने सोयाबीन बड़े पैमाने पर लगाया है. पिछले साल करीब 250 हेक्टेयर में सोयाबीन की फसल लगाई गई थी. इस साल ये रकबा दोगुना हो गया है और 450 हेक्टेयर के ऊपर किसानों ने सोयाबीन की बुवाई की है. जिन किसानों के पास सिंचाई की साधन है, ड्रिप, स्प्रिंकलर, माइक्रो स्प्रिंकलर जैसी सुविधाएं हैं वे खेती आकर रहे है।