सागर-4 की उम्र में आंखों की रोशनी चली गई,हार नहीं मानी,बैंक में कर रहे फर्राटे से काम sagar tv news
जितेंद्र परमार एमपी के सीहोर जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने दिल्ली से बैंकिंग की तैयारी की थी. एग्जाम दिया जिसमें पास हुए और अब पिछले 8 साल से सागर की मध्यांचल ग्रामीण बैंक में कार्यालय सहायक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. जितेंद्र को दिखाई नहीं देने के बावजूद भी हर किसी को फोन लगा लेते हैं. टाइपिंग कर लेते हैं किसी का मेल आता है तो उसे चेक कर लेते हैं किसी को मेल भेजना है तो वह भेज देते हैं बैंक संबंधित जो जिम्मेदारी उन्हें दी गई है. उसे बखूबी निभाते हैं,
जितेंद्र कहते हैं कि मेरे माता पिता बताते हैं कि 3-4 साल की उम्र तक मैं देख सकता था. धीरे-धीरे मेरी आंखों की रोशनी कम होने लगी. परिवार के लोग मुझे अलग-अलग नेत्र विशेषज्ञों के यहां ले गए. मेरी आंखों का ऑपरेशन हुआ, लेकिन इससे मुझे फायदा नहीं हुआ. तब से मुझे पूरी तरह से दिखना बंद हो गया. उस समय लगा कि अब कैसे पढ़ाई करूंगा. हताश होने लगा. इसी बीच मुझे परिवार के लोगों का सपोर्ट मिला. उन्होंने पढ़ाई में मेरी मदद की. पोस्ट ग्रेज्युशन के साथ मैंने दिल्ली में बैंकिंग सेक्टर में जॉब की पढ़ाई की. बैंक में 8 साल से काम कर रहा हूं. उन्होंने बताया कि कम्प्यूटर की स्क्रीन पर लिखा हुआ पढ़कर सुनाने वाले एक सॉफ्टवेयर और मोबाइल पर टॉकबैंक के ऑप्शन के जरिए मैं आसानी से अपना काम कर लेता हूं.