बेटियों ने चाट का ठेला लगाकर और 12th में 70% से अधिक अंक लाकर रचा इतिहास
बेटियों ने चाट का ठेला लगाकर और 12th में 70% से अधिक अंक लाकर रचा इतिहास
बेटियों की मेहनत को सलाम ठेला के साथ 70% अंक प्राप्त किये
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के अनुविभाग नौगांव नगर में रहने वाले एक परिवार पर एक वर्ष पूर्व काल के ही दिन दुखों का पहाड़ टूटा था, जब परिवार के मुखिया की मौत हो गई थी। तीन बच्चों का भरण पोषण करने के साथ पढ़ाई करने के लिए पैसों का टोटा पड़ा, लेकिन बेटियों ने अपने छोटे भाई के साथ पिता के व्यापार को शुरू किया और चाट का ठेका लगाकर परिवार का भरण पोषण के साथ अपनी पढ़ाई की और दोनों बहिनों सहित छोटे भाई ने भी अच्छे प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर नाम रोशन कर दिया।
दरहसल उरई यूपी के पास के एक गांव की रहने वाला यह परिवार 10 साल पहले छतरपुर जिले के नौगांव में काम करने के लिए आया था। जो पहले पिता चाट का ठेला लगाते रहे। पिता की एक साल पहले किसी करण से मृत्यु हो जाने के बाद घर की अर्थि स्थिति खराब हो जाने के बाद ,अब घर की दोनो बेटी और बेटे ने अपने कंधे पर घर का बोझ उठा रही है ,जो इस गरीब परिवार की सब से बड़ी बेटी से बात की तो उस ने अपना दुखड़ा मीडिया के कैमरे पास सुनाया ,कि आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण हम हर चाट का ठेला लगाते हैं। और पढ़ाई भी करते हैं, घर में कुल चार सदस्य हैं। जिसमें मां दो बेटी और एक बेटा है ,जो की दो बेटी और एक बेटा साथ में ही जा चाट का ठेला लगाते हैं। तीनों लोग मिल बात के काम करते हैं। और इसी चाट का ठेले से हमारा परिवार चलता है। सपने तो बहुत कुछ है, बहुत-बहुत कुछ बनने का है। पर अगर थोड़ी सी सरकार से मदद मिल जाए तो अभी तक सरकार से सिर्फ हमें राशन मिलता है। इसके अलावा किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल पाता है। इसका कारण यह भी हो सकता है ,कि हम यूपी के निवासी हैं। पर 10 साल पहले हम छतरपुर के नौगांव में रहने आ चुकी थी। और हमारे पिताजी चाट का ठेला लगते थे। पिताजी की मृत्यु हो जाने के बाद जब घर की आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी थी। तो फिर यह जुम्मा हमें उठाना पड़ा।