घरेलू हिंसा और पिता की प्रताड़ना से माँ का आत्मबल बढ़ाने निकली बेटी

राहतगढ़- राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन सागर इकाई के द्वारा संचालित डी.डी.यू.जी.के.वाय. के अन्तर्गत क्वेस कॉर्प लिमिटेड संस्था में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही आदिवासी बेटियों ने 6 माहों के विभिन्न ट्रेड में होने वाले प्रशिक्षण में दाखिला लिया है। इनमें राहतगढ़ के ग्राम मीरखेड़ी से कुमारी दुर्गा सौर, देवरी के बर्रइ से आरती गौड़, सागर के ग्राम हरदई से सीमा और संजू गौड़, केसली के भगवारा से जयंती गौड प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है। इनमें एक बेटी इस प्रशिक्षण में अपनी माँ के आत्मबल और आत्म सम्मान को बचाने के लिए घर से निकली है। उसने बताया कि पिता लगातार मॉ के साथ मार-पीट और अपमान करते थे। प्रताड़ना से तंग आकर माँ और बेटी ननिहाल में आकर रहने लगे। पिता ने तत्काल दूसरा विवाह कर लिया। दूसरी पत्नी से तीन बेटों को पाकर पिता और दादी दोनां इतराने लगे और इन माँ बेटी से और अधिक अपमानजनक वार्तालाप करने लगे, बेटी को लगा कि अब कुछ करना चाहिए, इसलिए वो 6 माह का प्रशिक्षण प्राप्त करके आत्मनिर्भर बनना चाहती है। अपनी माँ की आर्थिक मदद करने के साथ-साथ अपने पिता को ये बताना चाहती है कि बेटिया यादि ठान ले तो बेटो से कम नही है। कुमारी द्रोपती गौड़ दैनिक मजदूरी करने वाले अपने माता पिता को अब थोडा आराम देना चाहती है। उसका कहना है कि वो अपने वेतन से माता-पिता की आर्थिक मदद करेगी।
रागिनी गौड़, वंदना गौड़ इस प्रशिक्षण में इसलिये आयी है कि वे गांव की दूसरी लड़कियों का मार्ग प्रषस्त कर सकें। दरअसल गांव की कोई लड़की गांव से दूर पढ़ाई या किसी प्रशिक्षण में जाना चाहती है तो ग्रामीण परिवार उंगलियां उठाने लगते हैं। इस कारण कई लडकियों को पढाई भी छोड़ना पड़ी। ये दोनों बेटियां अब हिम्मत करके बाहर आयी है। वे आत्मनिर्भर बनके अपने गांव की रोल मॉडल बनना चाहती है। प्रार्थना का कहना है कि चूंकि परिवार के लोग विवाह का दवाव बना रहे थे जबकि उसका सपना आगे पढ़ाई करने का था। इस प्रशिक्षण में उसने आनन-फानन में अपना घर इसलिये छोड़ दिया कि सेंटर में आकर वो असमय विवाह के झमेले से बच सकेगी। इनमें दो बेटियां ऐसी भी है जो आगे पढ़ना चाहती थी और इनके पढाई के लिये कन्या छात्रावास की व्यवस्था भी थी, परन्तु गांव से दूरी होने के कारण उसकी सारी सहेलियों को परिवार वालो ने आगे पढ़ाई की अनुमति नहीं दी तो उन्होनें अपनी आत्मनिर्भरता का रास्ता इस प्रशिक्षण के माध्यम से खोजा है। ग्राम सलैया और श्रीनगर विकासखण्ड देवरी से आयी क्रांति गौड़, निशा गौड़ पहले लहसुन और प्याज के खेतों में रोपा लागाने का काम करती थी, लेकिन मन में पढ़ाई करने का सपना था उसी को पूरा करने वे यहां आई है।


By - sagartvnews
13-Dec-2022

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