सागर- बीना विधायक निर्मला सप्रे दल-बदल मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! उमंग सिंघार की याचिका खारिज
मध्यप्रदेश की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। बीना विधायक निर्मला सप्रे के कथित दल-बदल मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया है। गुरुवार को सुरक्षित रखे गए फैसले को सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष विचाराधीन है और इस स्तर पर न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने की। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं किए गए, जिनसे यह साबित हो सके कि विधायक निर्मला सप्रे ने कांग्रेस छोड़ दी है या उन्हें भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता दी गई है। निर्मला सप्रे की ओर से अदालत में यह दलील दी गई थी कि उन्होंने न तो कांग्रेस से इस्तीफा दिया है और न ही भाजपा की सदस्यता ली है। उनका कहना था कि उन्हें एक बेबुनियाद मामले में घसीटा जा रहा है।
उधर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की याचिका में दावा किया गया था कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर बीना सीट से जीतने के बाद निर्मला सप्रे ने स्वेच्छा से पार्टी छोड़ दी और भाजपा से जुड़ गईं। इसी आधार पर संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की गई थी। सिंघार की ओर से यह भी मांग की गई थी कि विधानसभा अध्यक्ष को इस मामले पर निर्धारित समय सीमा में फैसला लेने के निर्देश दिए जाएं। लेकिन हाईकोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। फिलहाल अदालत ने साफ कर दिया है कि अब नजर विधानसभा अध्यक्ष की कार्रवाई पर रहेगी, क्योंकि इस राजनीतिक मामले की अगली दिशा वहीं से तय होगी।