सागर- बीना विधायक, दल-बदल केस में हाईकोर्ट का बड़ा संकेत, पहले स्पीकर तय करेंगे किस्मत SAGAR TV NEWS
मध्य प्रदेश की सियासत से जुड़ा एक अहम मामला एक बार फिर चर्चा में है। सागर जिले की बीना विधायक निर्मला सप्रे के दल-बदल केस में जबलपुर हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई, लेकिन फैसला एक बार फिर टल गया। हालांकि इस बार कोर्ट ने एक बड़ा संकेत देते हुए साफ कर दिया कि मामले में पहले विधानसभा स्पीकर के स्तर पर निर्णय होना जरूरी है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब तक स्पीकर इस मामले में अपनी प्रक्रिया पूरी नहीं करते, तब तक हाईकोर्ट हस्तक्षेप नहीं करेगा। इसी के साथ कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 29 अप्रैल तय कर दी है।
दरअसल, इस पूरे मामले की जड़ 2023 के विधानसभा चुनाव से जुड़ी है। निर्मला सप्रे कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुनी गई थीं, लेकिन बाद में उनके भाजपा के कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद दल-बदल के आरोप लगे। इसके चलते उनकी सदस्यता खत्म करने की मांग की गई है। मामले में पहले 9 अप्रैल को विधानसभा स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष सुनवाई होनी थी, जिसे आगे बढ़ाकर अब 22 अप्रैल कर दिया गया है। अब इस तारीख पर होने वाली सुनवाई के बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से समय मांगा गया, यह कहते हुए कि महाधिवक्ता अन्य महत्वपूर्ण मामलों में व्यस्त हैं। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार कर लिया। वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से पेश अधिवक्ता ने लगातार हो रही देरी पर आपत्ति जताई और कहा कि मामला जानबूझकर लटकाया जा रहा है।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि 5 मई को इस मामले को दो साल पूरे हो जाएंगे, जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं कि दल-बदल जैसे मामलों का निपटारा तीन महीने के भीतर होना चाहिए। अब सभी की नजरें 22 अप्रैल को होने वाली स्पीकर की सुनवाई और 29 अप्रैल को हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जो इस मामले की दिशा तय कर सकती है।