राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य का दमोह दौरा, सफाई कर्मियों के वेतन और मिशन अस्पताल कांड पर दी सख्त चेतावनी
एमपी के दमोह में बुधवार शाम राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने दमोह का दौरा किया और यहां चल रहे चर्चित मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासन को फटकार लगाई। कानूनगो मानस भवन पहुंचे, जहां उन्होंने हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मियों से संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनी।
प्रियांक कानूनगो ने कहा कि 4 हजार रुपए मासिक वेतन पर सफाई कर्मियों से काम कराना नैतिक रूप से पाप और कानूनी रूप से अपराध है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में दोषी अधिकारियों को जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही उन्होंने दमोह के बहुचर्चित मिशन अस्पताल कांड को लेकर भी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में CMHO और जिला प्रशासन ने अस्पताल संचालक अजय लाल को बचाने की कोशिश की है। उन्होंने दस्तावेजों में गड़बड़ी, जानबूझकर गलत जानकारी देने और जांच को भटकाने के आरोप लगाए।
कानूनगो ने कहा कि अगर प्रशासन ने CMHO के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं की तो मानवाधिकार आयोग खुद हस्तक्षेप करके कार्रवाई करेगा। उन्होंने बताया कि मिशन अस्पताल ने प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत फंड लिया और फर्जी डॉक्टर से ऑपरेशन कराए, जो कि एक आर्थिक अपराध है। उन्होंने इस मामले की जांच के लिए आर्थिक अपराध अनुसंधान टीम (EOW) की मांग भी की।
गौरतलब है कि मिशन अस्पताल में फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट नरेंद्र विक्रमादित्य यादव ने खुद को लंदन के डॉक्टर डॉ. एनजोन केम बताकर कई हृदय रोगियों की सर्जरी की, जिनमें 7 मरीजों की जान चली गई। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी के पास फर्जी आधार, पैन कार्ड, मेडिकल डिग्री सहित कई नकली दस्तावेज मिले हैं। आरोपी इस समय पुलिस हिरासत में है।
प्रियांक कानूनगो ने स्पष्ट किया कि फर्जी डॉक्टरों और उन्हें संरक्षण देने वाले प्रशासनिक अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों का हनन किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रियांक कानूनगो, सदस्य, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग बोली “सफाई कर्मियों से 4000 रुपये वेतन में काम कराना अपराध है, और मिशन अस्पताल में प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”